नई दिल्ली: दिल्ली में IRS अधिकारी की बेटी की हत्या का आरोपी राहुल मीणा बेहद अय्याश किस्म का था। अधिकारी के घर में काम करने के बदले उसे हर महीने 20 हजार रुपये बतौर सैलरी मिलते थे, लेकिन इन पैसों को वह अपनी अय्याशियों पर खर्च कर देता था।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी राहुल को ऑनलाइन सट्टा खेलने के अलावा कॉल गर्ल (वेश्या) बुलाने का भी शौक था। इन्हीं गलत कामों के कारण उसकी सैलरी कुछ ही दिनों में खत्म हो जाती थी। अपने इस शौक को पूरा करने के लिए वह दूसरों से उधार लेना शुरू कर देता था। उस पर कर्ज इतना ज्यादा बढ़ गया था कि वह लंबे समय से उसे चुका नहीं पा रहा था और कर्जदार उसे परेशान करने लगे थे।
किस बात को मान लिया था अपमान?
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कोई पछतावा नहीं दिखाया। उसने कहा कि उसने लड़की पर इसलिए हमला किया क्योंकि उसने उसे पैसे नहीं दिए थे। बलात्कार और हत्या के बारे में उसने कोई सफ़ाई नहीं दी।
आरोपी के पिता उसी दफ्तर में काम करते थे, जहां पीड़िता के पिता काम करते थे। उन्होंने अपने बेटे को उस अफसर के यहां 20 हजार रुपये महीने की तनख्वाह पर रखवाया था।
आरोपी को अपनी नौकरी से निकाला जाना एक अपमान लगा और उसने कहा कि उसके मन में बदले की भावना पैदा हो गई थी।
उसे पैसों की तंगी ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए उकसाया। नौकरी से निकाले जाने के बाद उसने अपने गांव में कई हफ्ते ऑनलाइन ताश और लूडो खेलने में बिताए।
पूछताछ से पता चला है कि आरोपी एक विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति है। वह अपनी तनख्वाह वेश्याओं पर उड़ा देता था, और नौकरी के दौरान भी उस लड़की के प्रति उसकी नीयत खराब थी।
चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने बहुत कम पछतावा दिखाया और अपने बयान कई बार बदले। हालांकि, अदालत में उसका रवैया कुछ अलग ही नजर आया। उनसे कोर्ट में कहा कि उससे अपराध हो गया। गलती हो गई। राहुल ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट दीपिका ठकरान से कई बार यह बात कही। कोर्ट ने उसे 4 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। जब उससे उसके मकसद के बारे में पूछा गया, तो उसने कहा कि उसने यह सब पैसे के लिए किया। सुनवाई के दौरा मजिस्ट्रेट ने पूछा कि क्या तुम अपना अपराध मान रहे हो। हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि वह इसे इकबालिया बयान नहीं मानतीं।