नई दिल्ली: राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि कई लोग उनसे पूछ रहे थे कि वह NEET पेपर लीक मामले पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि जब वह विपक्ष में थे, तब सरकार से सवाल पूछना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन अब सत्ता पक्ष का हिस्सा होने के नाते उनकी भूमिका बदल गई है। उन्होंने कहा कि अब उनका दायित्व केवल सवाल उठाना नहीं, बल्कि समस्या का स्थायी समाधान देना है और यही वजह है कि वह इस विधेयक के साथ अपनी बात रख रहे हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि कैमरों के सामने बयान देना आसान था, लेकिन सरकार ने केवल बयानबाजी नहीं बल्कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का ठोस समाधान तैयार किया है। उनके मुताबिक एंटी पेपर लीक बिल परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे संगठित तरीके से होने वाले पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगेगी।
NEET छात्रों से बोले- आपका गुस्सा जायज है
राघव चड्ढा ने NEET अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका गुस्सा, दर्द और नाराजगी पूरी तरह जायज है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की चिंताओं को प्रधानमंत्री ने एक अभिभावक की तरह सुना और उसके बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने कहा कि सरकार पहली बार पेपर लीक के खिलाफ एक व्यापक कानूनी फ्रेमवर्क लेकर आई है।
’75 दिन में चार्जशीट, अगली NEET होगी कंप्यूटर आधारित’
राघव चड्ढा ने कहा कि सरकार ने मामले की जांच को लंबित नहीं रखा और मात्र 75 दिनों के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में NEET परीक्षा OMR शीट के बजाय कंप्यूटर आधारित प्रणाली से कराई जाएगी। उनके अनुसार नए कानून में इतनी कड़ी सजा का प्रावधान है कि अपराधी भविष्य में पेपर लीक करने से पहले भी डरेंगे।
‘पेपर लीक पैन इंडिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम’
राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक किसी एक राज्य, सरकार या राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी ‘पैन इंडिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम’ और ‘क्रॉनिक डिजीज’ है। उन्होंने पंजाब में 19 जुलाई 2026 को हुई फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल और अभ्यर्थियों से 13-13 लाख रुपये वसूले जाने के मामले का भी जिक्र किया।
‘कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं होता’
राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल मीडिया साउंड बाइट या राजनीतिक बयानबाजी से नहीं हो सकता। उन्होंने इसकी तुलना कैंसर से करते हुए कहा कि जिस तरह कैंसर का इलाज केवल क्रोसिन से नहीं किया जा सकता, उसी तरह पेपर लीक जैसी समस्या का स्थायी समाधान संस्थागत सुधारों और सख्त कानूनों से ही संभव है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस कानून का समर्थन किया जाए।