पीएम मोदी की पोस्ट भारत में ब्लॉक? BJP नेता ने फेसबुक पर लगाया सेंसरशिप का आरोप

नई दिल्ली: बीजेपी नेता तेजिंदर सिंह बग्गा ने फेसबुक (मेटा) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि फेसबुक पीएम मोदी की पेपर लीक मामले पर की गई पोस्ट को भारत में नहीं दिखा रहा है। उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई से जुड़ी एक पोस्ट की थी, जिसे मेटा ने भारत में ब्लॉक कर दिया है।

बग्गा ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि फेसबुक ने हर सीमा पार कर दी है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट को मेटा ने भारत में देखने से रोक दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके कहने पर एक विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत के प्रधानमंत्री की पोस्ट को ब्लॉक कर सकता है और यह तय कर सकता है कि भारतीय नागरिक क्या पढ़ें और क्या नहीं।

किसने दिया विदेशी प्लेटफॉर्म को अधिकार?

तेजिंदर बग्गा ने पोस्ट में कहा, इस विदेशी प्लेटफॉर्म को भारत के प्रधानमंत्री को सेंसर करने और यह तय करने का अधिकार किसने दिया कि भारतीय क्या पढ़ सकते हैं?

फेसबुक से मांगा जवाब

उन्होंने इसे केवल ‘कंटेंट मॉडरेशन नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र और डिजिटल संप्रभुता में हस्तक्षेप बताया। साथ ही फेसबुक से मांग की कि वह स्पष्ट करें कि उसने किस कानूनी अनुरोध के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। बीजेपी नेता ने कहा, मेटा देश की जनता को जवाब दे। उन्होंने पीएम मोदी की एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी अटैच किया है।

पेपर लीक को लेकर हुआ था विरोध

नीट प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली, यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में युवाओं ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफे की मांग की। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के तौर पर इस्तीफा दे दिया था। साथ ही सरकार ने युवाओं की अन्य मांगों को भी स्वीकार कर लिया।अब सरकार संसद में पेपर लीक विरोधी बिल लेकर आई है। यह कदम नीट पेपर लीक के खिलाफ कई सप्ताह तक चले देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। सोमवार को शून्यकाल के दौरान सदन में जारी विपक्ष सदस्यों के हंगामे के बीच मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने सदन की मेज थपथपाते हुए अपना समर्थन दिया।

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